सरकारी नियमों के अनुसार यह 15 साल से ऊपर जो गाड़ी है वह कबाड़ हो चुकी है। देखा जाए तो अगर किसी भी गाड़ी की RC यानी की (registration certificate) खत्म हो जाए तो सड़क सुरक्षा के लिए ट्रैफिक पुलिस अगर पकड़ ले तो गाड़ी जपत की जाती है और साथ में जुर्माना भी भरना पड़ सकता है।
पता नहीं RTO जालन्धर कार्पोरेशन पर इतना मेहरबान क्यों है जो इनको खुलेआम कानूनों की परवा किए बिना सड़कों पर चलाने देते है।
सूत्रो के हवाले से पता चला है की वर्कशॉप में कूड़ा ढोने वाली गाड़ियों की ना इंश्योरेंस है ना ही पॉल्यूशन कई निगम ड्राइवर जो की पूरी तरह स्वस्त भी नहीं ना ही उनके पास लाइसेंस है पर फिर भी निगम वर्कशॉप में लंबे समय से ड्राइवर है ?
देखना यह है की निगम कमिश्नर गौतम जैन और RTO Jalandhar इसके बाद क्या एक्शन लेते है या फिर चुपी सदी बैठे रहते है।

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